“हरियाणा के प्रदीप श्योराण एमबीए करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनियों में लंबे समय तक नौकरी करते रहे। मन नहीं लगा। छोड़कर अपने गांव आ गए। रोहतक में ‘बागड़ी मिल्क पार्लर’ नाम से पांच स्थानों पर स्वादिष्ट दूध बेचने लगे। अच्छी कमाई से हौसला बढ़ा तो कई तरह के मिल्क प्रॉडक्ट बेच रहे हैं। अपने स्टार्टअप की सफलता से उन्होंने सबसे ज्यादा अपने पिता को चौंकाया है।”

बागड़ी मिल्क पार्लर, फोटो (सोशल मीडिया)

देश में चरखी दादरी से गुजरात तक फैले ‘बागड़’ (इसी से बना है बागड़ी शब्द) क्षेत्र में भारतीय नस्ल की चौबीस तरह की गायों की उत्पत्ति हुई है। हरियाणा के उसी चरखी दादरी के गांव मांढी पिरानु के रहने वाले प्रदीप श्योराण मल्टीनेशनल कंपनियों में लंबा वक्त बिताने के बाद 17 दिसंबर 2018 से रोहतक में ‘बागड़ी मिल्क पार्लर’ ने पांच स्थानों पर स्वादिष्ट दूध की बिक्री कर हर महीने लाखों रुपए कमा रहे हैं। वह हिसार की गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी से एमबीए तक पढ़ाई कर चुके हैं। उनके पिता सरकारी शिक्षक रहे हैं, यह काम शुरू करते समय उनसे कहते थे कि दूध तो 10वीं पास आदमी भी बेच लेता है।

प्रदीप श्योराण ने जब दूध बेचना शुरू किया तो शुरुआत से अच्छी कमाई होने लगी। कामयाबी देखकर उनके पिता का संदेह जाता रहा। उन्होंने अपने काम की शुरुआत रोहतक से की। इसी साल 20 अप्रैल को प्रदीप को मसूरी के लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में बागड़ी मिल्क पार्लर के डेमो के लिए भी बुलाया गया था।

प्रदीप कहते हैं कि दूध तो हरियाणा समेत पूरे भारत की संस्कृति का हिस्सा रहा है। पिछले डेढ़ दशक से युवाओं का ठंडे पेयों की तरफ रुझान बढ़ा है। उनकी कोशिश है कि युवाओं की फिर से दूध-दही में दिलचस्पी बढ़ाई जाए। इसलिए वह अपने स्टार्टअप को सिर्फ कारोबार नहीं, एक चैलेंजिंग बदलाव के रूप में भी ले रहे हैं। प्रदीप ने पढ़ाई के बाद हैवेल्स, बर्जर पेंट जैसी कई मल्टीनेशनल कंपनियों में जॉब किए लेकिन मन नहीं लगा। वह खुद का कोई काम शुरू करने के बारे में सोचने लगे। वह कहते हैं कि खेती और पशुपालन ही दो ऐसे काम-धंधे हैं, जिनमें कमाई की पूरी गुंजायश हर वक़्त रहती है। वैसे भी वह बचपन से गांव की आबोहवा में रहे हैं।

इसी उधेड़-बुन में प्रदीप एक दिन अचानक अपने गांव लौट आए और स्टार्टअप की तरह देसी गायों के दूध का काम शुरु किया। कुछ ही महीनों में इस कारोबार में उनके पांव जम गए। लोगों को उनका दूध पसंद आने लगा। अब वह फूड स्टाल के साथ ट्राइसाइकिल से अपने उत्पाद बेचने के साथ ही गुड़ की कुल्फी भी बेचने की तैयारी में हैं।

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